समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में देवभूमि उत्तराखंड ने देश को दिया बड़ा संदेश

समान नागरिक संहिता लागू करने की दिशा में देवभूमि उत्तराखंड ने देश को बड़ा संदेश देने का प्रयास किया है। राज्य के धार्मिक और आध्यात्मिक स्वरूप के साथ ही राष्ट्रीय सुरक्षा के दृष्टिकोण से इस पहल को काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यद्यपि, पिछले 21 वर्षों से यह विषय चर्चा-परिचर्चा के केंद्र में अवश्य रहा है। इस अवधि में राज्य में चार निर्वाचित सरकारें भी आईं और गईं, लेकिन वे इस मामले में कदम आगे बढ़ाने में लगातार हिचकिचाती ही रहीं।
चीन और नेपाल की सीमा से सटे 53483 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले उत्तराखंड का राष्ट्रीय महत्व तो है ही, देवभूमि अपने धार्मिक और आध्यात्मिक स्वरूप के लिए विश्वभर में पहचान रखती है। राष्ट्रीय नदी गंगा के उद्गम स्थल वाले उत्तराखंड में हर साल ही चारधाम बदरीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री व यमुनोत्री समेत अन्य धार्मिक स्थलों में बड़ी संख्या में देश-विदेश से लोग पहुंचते हैं। ऋषि-मुनियों की यह धरती अनादिकाल से ही सामाजिक सद्भाव के साथ-साथ सभी प्राणियों को समान भाव से देखने का संदेश भी विश्व को देती आ रही है। ध्यान-योग के लिए तो सदियों से साधक इस हिमालयी राज्य के लिए रुख करते हैं।
पिछले कुछ समय से, विशेषकर राज्य विधानसभा चुनाव के दौरान उत्तराखंड में जनसांख्यिकीय बदलाव का मुद्दा प्रमुखता से उठा। सरकार की सोच रही है कि समुदाय विशेष को मिले अधिकारों के कारण सामाजिक सद्भाव पर प्रत्यक्ष-परोक्ष प्रभाव पड़ता है। माना जा रहा है कि इसने भी सरकार को समान नागरिक संहिता की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाने के लिए प्रेरित और प्रोत्साहित किया।

इस सबके मद्देनजर भाजपा की वर्तमान धामी सरकार ने देवभूमि में समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए महत्वपूर्ण पहल की है। साथ ही उसने यह दर्शाया है कि सरकार द्वारा जो निर्णय लिया गया है, उसे वह धरातल पर भी उतार रही है। सरकार ने यह संदेश देने का भी प्रयास किया है कि देवभूमि में रहने वाले लोग, चाहे वे किसी भी धर्म, वर्ग अथवा संप्रदाय से संबंधित हों, उन्हें राज्य में समान रूप से समान अधिकार मिलने चाहिए।
देश सरकार के इस कदम को दूरगामी परिणाम वाला बड़ा कदम माना जा रहा है। आने वाले दिनों में समान नागरिक संहिता का ड्राफ्ट तैयार होने के बाद सरकार क्या-क्या कदम उठाती है, इसे लेकर तस्वीर साफ हो जाएगी। साथ ही सरकार के इस निर्णय से अब देश के अन्य राज्य भी समान नागरिक संहिता लागू करने का निर्णय ले सकते हैं।


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