हिमालयी बदलावों का अध्ययन करने को जुटाए जा रहे आंकड़े, वैज्ञानिकों संग मंथन
उत्तराखंड ने हिमालयी क्षेत्र में हो रहे बदलाव को लेकर एक बड़ी पहल शुरू की थी, जिस पर अब आंकड़े जुटाने शुरू कर दिया है.
देहरादून: उत्तराखंड ने हिमालयी क्षेत्र में तेजी से हो रहे पर्यावरणीय और पारिस्थितिक बदलावों के अध्ययन को लेकर अपनी पहल को अब अगले चरण में पहुंचाना शुरू कर दिया है. हिमालय दिवस के मौके पर वैज्ञानिकों पर्यावरण विशेषज्ञों और विषय से जुड़े जानकारों के साथ हुई चर्चा में हिमालयी राज्यों की मौजूदा स्थिति, बदलते पर्यावरणीय हालात और भविष्य की चुनौतियों पर मंथन किया गया. इस दौरान हिमालय से जुड़े अलग-अलग पहलुओं के वैज्ञानिक और प्रमाणिक आंकड़े जुटाने पर विशेष जोर दिया गया.
दरअसल हिमालयी क्षेत्र में लगातार बदलती परिस्थितियों को देखते हुए उत्तराखंड सरकार ने देश के 13 हिमालयी राज्यों के लिए एक काउंसिल के गठन की पहल की है. इस काउंसिल में पर्यावरण और हिमालयी पारिस्थितिकी से जुड़े विशेषज्ञों को शामिल किया गया है. इसका उद्देश्य केवल हिमालय में होने वाले बदलावों पर चर्चा करना नहीं, बल्कि अलग-अलग राज्यों से तथ्य और आंकड़े जुटाकर भविष्य के लिए एक ठोस रणनीति तैयार करना है.
हिमालय दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में इसी दिशा में अब तक हुई प्रगति पर भी चर्चा की गई. काउंसिल के माध्यम से हिमालयी राज्यों की पर्यावरणीय स्थिति का अध्ययन किया जाएगा. इसके लिए प्रत्येक राज्य में हिमालयी क्षेत्र से जुड़े अलग-अलग मानकों पर जानकारी एकत्र की जा रही है. इनमें प्राकृतिक आपदाओं से लेकर विकास कार्यों और हिमालयी क्षेत्र में किए जा रहे विभिन्न कार्यों तक का डेटा शामिल किया जाएगा.
इस पहल के तहत यह भी समझने का प्रयास होगा कि अलग-अलग हिमालयी राज्यों में पर्यावरण और पारिस्थितिकी को लेकर किस तरह की परिस्थितियां बन रही हैं और राज्य सरकारें उनसे निपटने के लिए किस तरह की नीतियां अपना रही हैं. अलग-अलग राज्यों के आंकड़ों और नीतियों का अध्ययन करने के बाद एक व्यापक प्रारूप तैयार किया जाएगा, जिससे हिमालयी क्षेत्र को लेकर भविष्य की योजनाओं और नीतियों को ज्यादा प्रभावी बनाया जा सके.
यूकास्ट के महानिदेशक दुर्गेश पंत के मुताबिक
सरकार ने काउंसिल का गठन करते समय ही हिमालय को लेकर अपनी चिंता स्पष्ट कर दी थी. अब इसी चिंता को ठोस काम में बदलने की दिशा में आगे बढ़ा जा रहा है. मौजूदा परिस्थितियों को समझने के लिए सबसे जरूरी है कि हिमालयी राज्यों से संबंधित विश्वसनीय और पर्याप्त आंकड़े उपलब्ध हों. इसी को देखते हुए अलग-अलग क्षेत्रों से डेटा जुटाने का काम शुरू किया गया है.
-दुर्गेश पंत, महानिदेशक, यूकास्ट-
आने वाले समय में काउंसिल से जुड़े सदस्य देश के दूसरे हिमालयी राज्यों का दौरा भी करेंगे. वहां स्थानीय स्तर पर काम कर रहे विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों से बातचीत की जाएगी. इसका मकसद अलग-अलग राज्यों में हिमालयी पारिस्थितिकी और पर्यावरण की वास्तविक स्थिति को करीब से समझना है.दरअसल हिमालय केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के कई राज्यों की जल, पर्यावरण और जैव विविधता से जुड़ी जरूरतों का आधार है.
ऐसे में हिमालयी बदलावों का अध्ययन यदि वैज्ञानिक आंकड़ों के आधार पर किया जाता है तो भविष्य में आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और विकास योजनाओं के बीच बेहतर संतुलन बनाने में मदद मिल सकती है. उत्तराखंड की काउंसिल की यह पहल इसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखी जा रही है.
