सुखद गृहस्थी की कामना के साथ अखंड सौभाग्य के लिए सुहागिनों ने आज दिनभर निर्जला रहकर करवाचौथ का व्रत रखा हुआ है।



करवाचौथ पूजन का शुभ मुहूर्त शाम 5:34 बजे से 6:52 बजे तक होगा। चंद्रमा का उदय रात 8:03 बजे होगा। इसके बाद सुहागिनें चंद्रमा को अर्घ्‍य देकर व्रत खोलेंगी। वहीं, करवाचौथ की पूर्व संध्या पर बाजार में खासा उत्साह नजर आया। जेवरात के साथ कपड़े, कॉस्मेटिक और पूजा के सामान की दुकानों पर खरीदारी के लिए महिलाओं का तांता लगा रहा। ब्यूटी पार्लरों में भी लंबे समय बाद रौनक लौटी। व्यापारियों ने अन्य दिनों के मुकाबले दुकान भी देर से बंद की।

पिया के नाम की मेहंदी लगवाने को मेले जैसा नजारा:
मंगलवार को बाजार में मेहंदी लगाने के स्टॉलों पर मेले जैसा नजारा था। झंडा बाजार, हनुमान चौक, घंटाघर, पलटन बाजार में महिलाएं सुबह से मेहंदी लगवाने के लिए पहुंचने लगी थीं। भीड़ ज्यादा होने के कारण महिलाओं को अपनी बारी के लिए लंबा इंतजार करना पड़ा। बावजूद इसके उनका उत्साह फीका नहीं पड़ा। पलटन बाजार में तो रात 12 बजे तक एलईडी की रोशनी में मेहंदी लगाई गई। महिलाओं में सबसे ज्यादा क्रेज लोटस चेक, हाफ चेक, हाफ लोटस, एचडी डिजाइन की मेहंदी को लेकर रहा।

मेहंदी को भीड़ बढ़ी तो ओवररेटिंग भी की:
भीड़ का फायदा उठाकर मेहंदी के स्टॉलों में ओवररेटिंग भी की गई। सुबह जो मेहंदी 300 रुपये में लगाई जा रही थी, शाम होते-होते उसकी कीमत दो से ढाई गुना तक बढ़ गई। पलटन बाजार में मेहंदी का स्टॉल लगाने वाले इरशाद ने बताया कि 300 से 2000 रुपये तक के मेहंदी के डिजाइन उपलब्ध हैं। अधिकांश महिलाओं ने मेहंदी लगवाने के लिए 1000 से 1500 रुपये तक खर्च किए।

मिठाई की खरीदारी से परहेज:
कोरोना संक्रमण के चलते इस बार लोग खाने-पीने की चीजें बाहर से कम ही खरीद रहे हैं। मिठाई कारोबारी राजीव ने बताया कि इस बार काम में ज्यादा तेजी नहीं दिखी। जो भीड़ करवाचौथ के दो दिन पहले दुकान में नजर आती थी, वह त्योहार की पूर्व संध्या पर दिखी। लोग मिठाई सिर्फ शकुन के लिए खरीद रहे हैं। इस बार फीकी और मीठी मट्ठी, फैनी, मीठे समोसे की मांग ज्यादा रही।

व्रत का महत्व और पूजा की विधि:
पं. विष्णु प्रसाद भट्ट के मुताबिक इस दिन सूर्योदय से चंद्रोदय तक निर्जला व्रत रखकर सुहागिनें मां पार्वती से महिलाएं अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। पूजन के बाद करवे में जल भरकर कथा सुनने का विधान है। सास की दी गई सरगी करवाचौथ पर शुभ मानी जाती है। इस दिन सुबह जल्दी उठ जाएं और सूर्य उदय होने से पहले ही स्नान कर लें। सरगी के रूप में जो भोजन मिला है, उसे ग्रहण कर पानी पीयें। इसके बाद निर्जला व्रत रखने का संकल्प कर एक चौकी पर शिव परिवार और श्रीकृष्ण की स्थापना करें। गणोश पूजन के बाद शिव-पार्वती को बेलपत्र और श्रृंगार की वस्तुएं व श्रीकृष्ण को माखन-मिश्री और पेड़ा चढ़ाएं। इसके बाद करवा माता का चित्र लगाएं। धूप, दीप, चंदन, रोली, सिंदूर रखें और घी का दीपक जलाएं। चांद निकलने से करीब एक घंटा पहले पूजा शुरू कर देनी चाहिए। इसके लिए मिट्टी के करवा में दूध, जल और गुलाब जल डालें। चंद्रमा की पूजा करने के बाद अर्घ्‍य दें। इसके बाद पति के हाथ से जल पीकर व्रत खोलें।

सराफा कारोबारियों के खिले चेहरे:
करवाचौथ पर पत्नी को तोहफा देने के लिए ज्वेलरी की भी खूब खरीदारी की गई। इससे सराफा कारोबारियों के चेहरे भी खिले नजर आए। सराफा कारोबारियों की मानें तो बीते तीन दिन में कारोबार ने तेजी से रफ्तार पकड़ी है। युवा सराफा मंडल के महासचिव गौरव रस्तोगी ने बताया कि करवाचौथ पर कारोबार उम्मीद से बेहतर रहा। नेकलेस, चेन, कंगन, अंगूठी की मांग अधिक रही।

चीनी सामान से बनाई दूरी:
प्रधानमंत्री के वोकल फॉर लोकल पर अमल करते हुए कारोबारियों ने इस बार चीनी सामान से दूरी बना ली है। ऐसे में बाजार में चीनी सामान नहीं के बराबर नजर आया। करवाचौथ पर चूड़ी और कंगन की अच्छी मांग रहती है। अन्य सामानों की तरह चूड़ी और कंगन के बाजार पर भी अभी तक चीन का दबदबा रहता था। इस बार ग्राहकों और कारोबारियों ने चीन को चूड़ी-कंगन के बाजार से पूरी तरह आउट कर दिया। पलटन बजार में कॉस्मेटिक की दुकान चलाने वाले रजत ने बताया कि इस बार चाइनीज चूड़ी-कंगन के स्थान पर चंडीगढ़ और जयपुर के चूड़ी-कंगन हाथों की शोभा बढ़ा रहे हैं।


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