नौ पालीटेक्निक काॅलेजों में डिग्री काॅलेज खोले जाने के मामले में शासन को पीछे हटना पड़ा है।



राज्य के नौ पालीटेक्निक काॅलेजों में डिग्री काॅलेज खोले जाने के मामले में शासन को पीछे हटना पड़ा है। पालीटेक्निक कालेजों को उच्च शिक्षा विभाग को स्थायी रूप से हस्तांतरित करने के आदेश को निरस्त कर दिया गया है। अब इन पालीटेक्निकों में पहले की तरह चलाया जाएगा।

पूर्व में उच्च शिक्षा विभाग ने सर्वे कर ऐसे पालीटेक्निक कालेजों का ब्योरा जुटाया था जिनमें साल दर साल विद्यार्थियों की संख्या कम हो रही है। सर्वे के आधार पर विभाग ने उत्तराखंड प्राविधिक शिक्षा परिषद को पत्र भेजकर 12 पालीटेक्निकों के हस्तांतरण का अनुरोध किया था। हाल ही में परिषद के निदेशक हरि सिंह की ओर से नौ पालीटेक्निक कालेजों में अध्ययनरत विद्यार्थियों को मेरिट के आधार पर दूसरे पालीटेक्निक में शिफ्ट करने के आदेश दिए गए थे। उन्होंने अपने आदेश में इन पालीटेक्निकों को उच्च शिक्षा विभाग को स्थायी रूप से हस्तांतरित किए जाने हवाला दिया था।

11 पालीटेक्निकों को जीवनदान:
राज्य के ऐसे 11 पालीटेक्निकों को भी जीवनदान मिला है जिन्हें कम छात्र संख्या के चलते बंद करने की तैयारी की जा रही थी। इस साल इन पालीटेक्निकों में मैकेनिकल, आइटी, इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग, एमओएम, सिविल इंजीनियरिंग जैसे ब्रांच की 575 सीटों पर दाखिले भी दिए जाएंगे।

इनको हस्तांतरित होना था:
राजकीय पालीटेक्निक पौड़ी, गोपेश्वर, जखोली, कपकोट, मल्लासालम, चौनलिया, बेरीनाग और चम्पावत

इनको भी मिला जीवनदान:
राजकीय पालीटेक्निक जीेशीमठ, हिंडोलाखाल, बंस, पीपली, चोपता, पाबौ, कांदीखाल, जाखणीधार, बरम, डीडीहाट, दन्या


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